NCERT class 10th history Chapter 5 अर्थ-व्यवस्था और आजीविका Notes pdf

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Bihar Board Class-10 History Chapter-5 अर्थ-व्यवस्था और आजीविका subjective Notes Pdf

लघु उतरिय प्रश्न (60 शब्दों में उत्तर दें):-

प्रश्न 1. औधोगिकरण से आप क्या समझते है ?

उत्तर– किसी देश के आधुनिकरण का प्रेरक औधोगिकरण है. यह वह प्रक्रिया है जिसमे उत्पादन मशीनों द्वारा कारखानों में होता है. यह उधोगों का वृहत रूप है जो नये-नये मशीनों के अविष्कार एवं तकनीकी विकाश पर निर्भर करता है. इसके द्वारा उत्पादित वस्तु की खपत के लिए बड़े बाज़ार की आवश्यकता होती है.

प्रश्न 2. औधोगीकरण ने मजदूरों की आजीविका को किस तरह प्रभावित किया?

उत्तर– औधोगीकरण के क्रम में कल पुर्जो एवं मशीनों के आगे साधारण गृह उधोग एक प्रकार से नाकारा साबित होने लगे . परिणामस्वरूप ये जबरन 16 से 18 घंटे काम करने वाले वैतनिक मजदूर बन गये. ऐसी स्थिति में बेरोजगारी में भी जबरदस्त वृद्धि हुयी . इनका कष्टमय जीवन इनके मन में मशीनों के प्रति घृणा पैदा कर दी जिससे उधोगपतियो और मजदूरो के बीच संधर्ष को जन्म दिया.

प्रश्न 3. स्लम पद्धति की शुरुवात कैसे हुई ?

उत्तर– औधोगीकरण ने मजदुर वर्ग को जन्म दिया जिनका जीवन स्तर काफी निम्न था और वे उधोगपतियों के द्वारा शोषित भी थे . नतीजा यह हुआ कि वे शहर में छोटे-छोटे घरो में रहने लगे जहाँ बुनियादी सुविधाओ का आभाव था . इस प्रकार स्लम पद्धति की शुरुआत हुई.

प्रश्न 4. न्यूनतम मजदूरी कानून कब पारित हुआ और इसके क्या उदेश्य थे?

उत्तर– न्यूनतम मजदूरी कानून 1948 ई. में पारित हुआ जिसके उदेश्य थे-

  • मजदूरी की दर निर्धारित करना
  • आजीविका और अधिकारों की रक्षा करना
  • कुशलता बनाये रखना.

प्रश्न 5. कोयला एवं लौह उधोग ने औधोगीकरण को गति प्रदान की, कैसे?

उत्तर– औधोगीकरण के क्रम में अविष्कार और तकनिकी विकास भी जारी रहा . नये नये मशीनों को बनाने के लिए लौह उधोग की आवश्यकता हुई और मशीनों को इंजन से चलाने के लिए कोयला की आवश्यकता हुई. बड़े पैमाने पर इनकी आवश्यकताओ ने औधोगीकरण को गति प्रदान की.

दीर्घ उतरिय प्रश्न ( 150 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1. औधोगीकरण के कारणों का उल्लेख करें.

उत्तर– 18 वीं सदी के मध्य में यूरोप विशेषकर इंग्लैंड में मानवीय विकास की अवधारणा के रूप में औधोगिकरण सामने आया जिसके कारणों को निम्न शीर्षकों के अंतर्गत रखा जा सकता है

  1. आवश्यकता अविष्कार की जननी – यूरोप में दैनिक जीवन स्तर उच्चतर होते जाने से उपभोग प्रवृति में वृद्धि हुयी जिससे औधोगीकरण की आवश्यकता महसूस हुई.
  2. नये-नये मशीनों का अविष्कार – यूरोप में वैज्ञानिक उपलब्धियों ने नये-नये मशीनों को जन्म दिया. परिणाम स्वरूप औधोगिकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ.
  3. कोयले एवं लोहे प्रचुरता– इंजनो को चालने और बनाने के लिए कोयले एवं लोहे की आवश्यकता हुई जो प्रचुर मात्रा में खनिज संसाधनों के रूप में थे.
  4. सस्ते श्रम की उपलब्धता – बेरोजगारी और उपनिवेशों से काफी सस्ते श्रम उपलब्ध हो जाते थे.
  5. यातायात की सुविधा– कच्चे माल को लाने और तैयार माल को बाजारो तक पहुँचने के यातायक की सुविधा विकसित थी.
  6. विस्तृत बाजार– उपनिवेश विस्तृत बाजार के रूप में भी थे

प्रश्न 2. औधोगीकरण के परिणामस्वरूप होने वाले परिवर्तनों पर प्रकाश डालें .

उत्तर-औधोगिक क्रांति की देने औधोगीकरण ने वेशक विश्व को एक नई राह पर खड़ा किया . परन्तु इसके परिणाम स्वरूप अच्छे परिवर्तन हुए तो या दुष्परिनामो से भी अछूता नहीं रहा.

औधोगिकरण ने नगरो का विकास किया दैनिक जीवन स्तर उच्च से उच्चतर होती चली गयी . लोगो को उपभोग की वस्तुएँ सहज उपलब्ध होने लगी. आवश्यकताओ के बढ़ने से नयें अविष्कार होते चले गये. विश्व भौतिकवादी होने लगा. दूरियाँ अब नजदीकी में बदलने लगी .

औधोगीकरण ने ऐसे परिस्थितियाँ पैदा कर दी की पूरी दुनिया दो वर्गों अर्थात पूंजीपति और श्रमिक में बंट गयी जिसने वर्ग संघर्ष को जन्म दिया. घरेलु उधोग और कुटीर उधोगों के पतन से बेरोजगारी में वृद्धि हुयी. साम्राज्य वादी प्रवृति की लपते कोने कोने में पहुंचने लगी. स्लमपद्धति की शुरुवात हुयी . अविकसित देशो में आन्दोलन की लपते भी उठने लगी.

भारत के संदर्भ में देखा जाए तो बड़े-बड़े उधोग जरुर स्थापित हुए. परन्तु प्राचीन गृह उधोग ह्व्स्त हो गये जिससे बेरोजगारी में बेतहाशा वृद्धि हुयी.

प्रश्न 3. उपनिवेशवाद से आप क्या समझते है ? औधोगिकरण ने उपनिवेशवाद को जन्म दिया कैसे ?

उत्तर– उपनिवेशवाद का तात्पर्य है बिना सैनिक शक्ति के किसी देश के शासन पर प्रभाव डालकर वहाँ व्यपार और व्यवस्था करने तथा विभिन्न प्रकार के उधोगों की स्थापना के लिए सुविधा प्राप्त कर लेना तथा उस देश को अपने उपर निर्भर बना लेना .

उपनिवेशवाद क्व जन्म में जहाँ तक औधोगीकरण का सवाल है तो निश्चय ही उपनिवेशवाद औधोगीकरण का ही देन है औधोगीकरण ने उत्पादन को अवयधिकबढ़ा दिया अतिरिक्त उत्पादन को खपाने के लिए ही उपनिवेशवाद का उदय हुआ . इसके अतिरिक्त औधोगीकरण के लिए आवश्यक कारणों में कच्चे माल, सस्ते श्रम, बाजार भी महत्वपूर्ण थी . चूँकि उन परिस्थितियों में ये सारे चीज उपनिवेशवाद की स्थापना के फलस्वरूप प्राप्त हो सकते थे . इसी कारण औधोगीकरण ने उपनिवेशवाद को जन्म दिया . भारत के संदर्भ में देखा जाये तो हमारा देश भी इसी उपनिवेशवाद का शिकार बना और गुलामी का देश लगभग 400 वर्षों तक झेला.

प्रश्न 4. कुटीर उधोग के महत्व एवं उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डालें .

उत्तर– वर्तमान विश्व निश्चित रूप से औधोगीकरण के बेहतर दौर में है जिससे विश्व का एक पक्ष चाँद की तरह प्रकाशमान अर्थात विकसित नजर आ रहा है परन्तु दूसरा पक्ष घोर अंधकार अर्थात गरीबी, बेरोजगारी आदि के दल-दल में जी रही है इस पक्ष को प्रकाशित करने के लिए कुटीर उधोग ही प्रासंगिक हो सकता है . इस सचाई को नकारना विकसित देशो के लिए संभव नहीं होगा जो खुद इसकी चपेट में आते नजर आ रहे है .

वस्तुतः कुटीर उधोग उपभोगता वस्तुओ, अत्यधिक संख्या को रोजगार तथा राष्ट्रिय आय का अत्यधिक समान वितरण सुनिश्चित करते है . इस प्रकार सामाजिक आर्थिक आदि समाधान इन्ही उधोगो से होता है. साथ ही साथ ये जनसंख्या के बड़े शहरो में प्रवाह को भी रोकता है . भारत के संदर्भ में देखा जाए तो यहाँ कुटीर उधोग का विकास नितांत आवश्यक है . इसके सामाजिक ढाँचा भी मजबूत होगा साथ ही साथ अर्थव्यवस्थाभी उन्नत होगा जिससे हम स्वस्थ भारत की स्वस्थ तस्वीर का राग अलाप पाएंगे .

प्रश्न 5. औधोगीकरण ने सिर्फ आर्थिक ढाँचे को ही प्रभावित नहीं किया बल्कि राजनैतिक परिवर्तन का भी मार्ग प्रशस्त किया, कैसे ?

उत्तर– औधोगीकरण के लिए बाजार, कच्चे माल, सस्ते श्रम की आवश्यकता ने दुनिया को उपनिवेशवाद से परिचय कराया जो शोषण पर आधारित राज्नैतिकं अवधारणा थी . उपनिवेशवाद का अंतिम विकास सम्राज्यवाद था .

मजदूरो के निरंतर शोषण ने भी उनके हितो की रक्षा के लिए राजनीतिक स्तर पर समाजवाद और साम्यवाद जैसे सिदांतो को जन्म दिया जिससे एक नया सता संघर्षशुरू हुआ . रूस में तो मजदूरो की भी सरकार बन गयी जो अन्य देशो के लिए प्रेणा श्रोत भी बन गये .

औधोगीकरण ने राष्ट्रवाद की चरम अवधारणा अतिराष्ट्रवाद को भी जन्म दिया जिससे अनेक राजनीतिक संगठन बने जिसने राष्ट्रिय स्तर पर अपनी पहचान बनायी . गुलाम देशों में राष्ट्रवाद की भावना ने स्वतंत्रता की मांग को प्रबल बना दिया .

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पाठ – 1यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय,
यूरोप में राष्ट्रवाद
पाठ – 2समाजवाद एवं साम्यवाद
पाठ – 3हिन्द-चीन में राष्ट्रवादी आन्दोलन
पाठ – 4भारत में राष्ट्रवाद
पाठ – 5अर्थ-व्यवस्था और आजीविका
पाठ – 6शहरीकरण एवं शहरी जीवन
पाठ – 7व्यापार और भूमंडलीकरण
पाठ – 8प्रेस संस्कृति एवं राष्ट्रवाद

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